BRAHMIN SAMAJ KA PARICHAYsteemCreated with Sketch.

in #brahmin8 years ago

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ब्राह्मण* खुद एक काल है , वेद है , शास्त्र है , समय है और एक अमिट अपार शक्ति है .. शिवजी के अंश से पैदा हुई उर्जा का अंश है ब्राह्मण ..

ये वो मानव जाति है जो युद्ध में चलते हुए रथ का पहिया बदल देते हैं ..
इनके पास जन्म से ही अस्त्र शस्त्र ज्ञान का योग होता है जो पृथ्वी पर और किसी भी मानव जाति में नहीं होता..
इनके बिना तो देवालय भी अशुद्ध माने जाते हैं ..
इनके अंदर त्रिदेव शक्ति विद्यमान है ..

  1. ब्रह्मा जी का ब्रह्म ज्ञान
  2. विष्णु जी का स्तुतीकरण
  3. शिव जी का अमिट प्रभान

देवों का भी सबसेप्रिय मानव ब्राह्मण ही है
क्योंकि ये हर क्षेत्र में निपुण हैं;
वो चाहे अस्त्र शस्त्र हो,
काल वैदिक शास्त्र हो
या भौतिक जगत ज्ञान हो

इस पृथ्वी पर वर्तमान में 42 करोड़ 43 लाख ब्राह्मण हैं;
अगर पृथ्वी के एक कोने पर मिलकर खड़े हो गए तो पृथ्वी को एक तरफ झुका सकते हैं ...

सबसे ज्यादा ब्राह्मण की जनसंख्या वाला देश ....
हिन्दुस्तान,
4 करोड़ 68 लाख

सबसे ज्यादा प्रतिशत ब्राह्मण जनसंख्या वाला राज्य ..राजस्थान ,
50% ब्राह्मण हैं

ब्राह्मण के देश;
हिन्दुस्तान , नेपाल , श्री लंका , भूटान , तिब्बत , मयंमार , चीन , अफगानिस्तान , तुर्किस्तान
और

ब्राह्मण के संस्कार सबसे अहम हैं,
ब्राह्मण की शक्ति सबसे अमिट है,
ब्राह्मण का सम्मान सबसे बड़ा सम्मान है

ब्राह्मण ना राज के भूखे हैं,
ब्राह्मण ना ताज के भूखे हैं,
ब्राह्मण एक अमिट शक्ति है,
ब्राह्मण सम्मान और संस्कार के भूखे होते हैं

विश्व ब्राह्मण मंच
हर हर महादेव,
जय ब्राह्मण संस्कार,
जय ब्राह्मण ,
जय हिन्दुत्व राज

अगर ब्राह्मण का अपमान किया तो समझ लो देवों का अपमान किया,
अगर ब्राह्मणों को खुश रखोगे तो देव भी खुश रहेंगे।
हर हर महादेव।।

जनेऊ क्या है और इसकी क्या महत्वता है?
भए कुमार जबहिं सब भ्राता।
दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता॥

जनेऊ क्या है : आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को जनेऊ कहते हैं। जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। जनेऊ को संस्कृत भाषा में ‘यज्ञोपवीत’ कहा जाता है।

यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे।

तीन सूत्र क्यों : जनेऊ में मुख्यरूप से तीन धागे होते हैं।

यह तीन सूत्र देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक होते हैं और यह सत्व, रज और तम का प्रतीक है।

यह गायत्री मंत्र के तीन चरणों का प्रतीक है।यह तीन आश्रमों का प्रतीक है। संन्यास आश्रम में यज्ञोपवीत को उतार दिया जाता है।

नौ तार : यज्ञोपवीत के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। इस तरह कुल तारों की संख्या नौ होती है। एक मुख, दो नासिका, दो आंख, दो कान, मल और मूत्र के दो द्वारा मिलाकर कुल नौ होते हैं।

पांच गांठ : यज्ञोपवीत में पांच गांठ लगाई जाती है जो ब्रह्म, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक है।

यह पांच यज्ञों, पांच ज्ञानेद्रियों और पंच कर्मों का भी प्रतीक भी है।

वैदिक धर्म में प्रत्येक आर्य का कर्तव्य है जनेऊ पहनना और उसके नियमों का पालन करना।

प्रत्येक आर्य जनेऊ पहन सकता है बशर्ते कि वह उसके नियमों का पालन करे।

जनेऊ की लंबाई : यज्ञोपवीत की लंबाई 96 अंगुल होती है। इसका अभिप्राय यह है कि जनेऊ धारण करने वाले को 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए।

चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक मिलाकर कुल 32 विद्याएं होती है।

64 कलाओं में जैसे- वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी, साहित्य कला, दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण, कृषि ज्ञान आदि।

जनेऊ के नियम :

1.यज्ञोपवीत को मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व दाहिने कान पर चढ़ा लेना चाहिए और हाथ स्वच्छ करके ही उतारना चाहिए। इसका स्थूल भाव यह है कि यज्ञोपवीत कमर से ऊंचा हो जाए और अपवित्र न हो।

अपने व्रतशीलता के संकल्प का ध्यान इसी बहाने बार-बार किया जाए।

2.यज्ञोपवीत का कोई तार टूट जाए या 6 माह से अधिक समय हो जाए, तो बदल देना चाहिए। खंडित यज्ञोपवीत शरीर पर नहीं रखते। धागे कच्चे और गंदे होने लगें, तो पहले ही बदल देना उचित है।

4.यज्ञोपवीत शरीर से बाहर नहीं निकाला जाता। साफ करने के लिए उसे कण्ठ में पहने रहकर ही घुमाकर धो लेते हैं। भूल से उतर जाए, तो प्रायश्चित करें ।

5.मर्यादा बनाये रखने के लिए उसमें चाबी के गुच्छे आदि न बांधें। इसके लिए भिन्न व्यवस्था रखें। बालक जब इन नियमों के पालन करने योग्य हो जाएं, तभी उनका यज्ञोपवीत करना चाहिए।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार दाएं कान की नस अंडकोष और गुप्तेन्द्रियों से जुड़ी होती है। मूत्र विसर्जन के समय दाएं कान पर जनेऊ लपेटने से शुक्राणुओं की रक्षा होती है।

वैज्ञानिकों अनुसार बार-बार बुरे स्वप्न आने की स्थिति में जनेऊ धारण करने से इस समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

कान में जनेऊ लपेटने से मनुष्य में सूर्य नाड़ी का जाग्रण होता है।

  • कान पर जनेऊ लपेटने से पेट संबंधी रोग एवं रक्तचाप की समस्या से भी बचाव होता है।

  • माना जाता है कि शरीर के पृष्ठभाग में पीठ पर जाने वाली एक प्राकृतिक रेखा है जो विद्युत प्रवाह की तरह काम करती है। यह रेखा दाएं कंधे से लेकर कमर तक स्थित है।

जनेऊ धारण करने से विद्युत प्रवाह नियंत्रित रहता है जिससे काम-क्रोध पर नियंत्रण रखने में आसानी होती है।

  • जनेऊ से पवित्रता का अहसास होता है। यह मन को बुरे कार्यों से बचाती है। कंधे पर जनेऊ है, इसका मात्र अहसास होने से ही मनुष्य भ्रष्टाचार से दूर रहने लगता है।

सभी ब्राह्मणों के लिए अति महत्वपूर्ण कर्म
1- ईश्वर की आराधना एवं पूजा पाठ
2.जनेऊ धारण करना ।
3.,नित्य स्नान ।
4.गऊ पूजा।
5.प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों एवं शास्त्रों का अनुशीलन ।
6.सदाचार आचरण ।
7.मांसाहार और मदिरा से दूर रहें ।
8 अपने बच्चो को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी दें।
9.धूम्र पान से दूर रहें ।
10.महिलाओ का सम्मान करें ।
11.झूठ का परित्याग करें ।
12.मीठी वाणी बोलें मृदुभाषी बनें ।
13-सनातन हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार करें ।
14- आरक्षण का पुरेजोर विरोध करें ।
15 - ब्राह्मणों का यथासम्भव सहयोग करें ।
16 - अपने ब्राह्मण जाति के प्रति विशेष स्नेह एवं आत्मीयता का भाव प्रदर्शित करें।
17- ब्राह्मण लड़के/लड़कियाँ अन्तर्जातीय (अन्य जाति में) एवं विधर्मियों के साथ विवाह से बचें ।
18- ब्राह्मण लड़के/लड़कियाँ अन्य जाति में प्रेम से बचें।
19- किसी दूसरी जाति या धर्म की बुराई न करें ।
20- अधिक से अधिक दोस्ती ब्राह्मणों से करने की कोशिश करें।
21- ब्राह्मण हमेशा गुटों में रहें चाहे कालेज हो,सरकारी/गैरसरकारी प्रतिष्ठान हो अथवा फिर अपनी सोसाइटी ।
22 - ब्राह्मण अपने समाज की कुरीति दहेज प्रथा से बचें।
23-सम्पन्न ब्राह्मण गरीब ब्राह्मणों की सहयता करें।
24.- डाक्टर एवं अधिवक्ता ब्राह्मण,गरीब ब्राह्मणों से फ़ीस ना लें या कम लें तथा ब्राह्मण शिक्षक गरीब ब्राह्मण बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करें ।
25-प्रशासनिक अधिकारी ब्राह्मणों को देखते ही उनकी हर संभव सहायता करें ।

  1. हलो हाय की जगह जय श्री परशुराम अथवा हरि 🕉 अथवा जय श्री राम बोलें।
    ब्राह्मण हित और ब्राह्मण एकता पर काम करते रहैं ।

ब्राह्मणों की जय हो
एक रहो,नेक रहो।

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